Overview
वॉक इन टनल (बड़ी सुरंग) राजस्थान सरकार के उद्यान विभाग द्वारा संचालित संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) की एक योजना है। इसके अंतर्गत नियंत्रित वातावरण में उच्च मूल्य वाली सब्जियों, फूलों एवं फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए वॉक इन टनल के निर्माण पर किसानों को अनुदान दिया जाता है। इससे किसान विपरीत मौसम में भी गुणवत्तापूर्ण उपज लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
Who it's for
Eligibility
- आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए।
- आवेदक के पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व होना आवश्यक है।
- भूमि पर सिंचाई का सुनिश्चित स्रोत उपलब्ध होना चाहिए।
- एक लाभार्थी अधिकतम 800 वर्ग मीटर (अधिकतम 5 इकाई) अथवा 400 वर्ग मीटर (अधिकतम 10 इकाई) क्षेत्र तक अनुदान का पात्र है।
Who is not eligible
- जिन किसानों के पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व नहीं है, वे पात्र नहीं हैं।
- सिंचाई के सुनिश्चित स्रोत के अभाव में आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता।
- प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने से पूर्व किया गया निर्माण अनुदान हेतु मान्य नहीं होगा।
Documents required
How to apply
- 1नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें।
- 2आवश्यक दस्तावेज़ (जनआधार, जमाबंदी, मृदा एवं जल जाँच रिपोर्ट तथा अधिकृत फर्म का कोटेशन) अपलोड करें।
- 3उद्यान विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही वॉक इन टनल का निर्माण कार्य प्रारंभ करें।
- 4निर्माण पूर्ण होने पर विभाग द्वारा गठित समिति से मौके पर सत्यापन कराएँ।
- 5सत्यापन के पश्चात अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में (अथवा किसान की लिखित सहमति से फर्म को) डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
Frequently asked questions
वॉक इन टनल योजना में कितना अनुदान मिलता है?
इकाई लागत या स्वीकृत फर्म दर में से जो कम हो, उस राशि पर 50% तक अनुदान दिया जाता है, जो अधिकतम 800 वर्ग मीटर (अधिकतम 5 इकाई) अथवा 400 वर्ग मीटर (अधिकतम 10 इकाई) क्षेत्र तक सीमित है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
राजस्थान के वे मूल निवासी किसान पात्र हैं जिनके पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व तथा सिंचाई का सुनिश्चित स्रोत उपलब्ध है।
आवेदन कैसे और कहाँ करें?
नजदीकी ई-मित्र केंद्र से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। उद्यान विभाग की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही निर्माण कार्य प्रारंभ करें।
अनुदान राशि कैसे प्राप्त होती है?
निर्माण पूर्ण होने पर विभागीय समिति द्वारा सत्यापन के बाद अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
Disclaimer: This information is for general guidance only. ClariNexusHub is not a government body. Scheme rules and amounts can change, so always confirm the details and apply on the official portal linked below.